कृषि ड्रोन उड़ाने के लिए कैसे मिलेगा लाइसेंस, पड़ोसी राज्य ने शुरू की पहल…

देश में एग्रीकल्चर के क्षेत्र में ड्रोन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने कृषि ड्रोन योजना संचालित की है, जो खेतो में बुआई गई फसल की जानकारी दे सकेंगे. खेती से जानकारी इससे पता कर सकते हैं. इसका मकसद खेती किसानी को आसान बनाना है. केंद्र सरकार कई योजनाओं के तहत किसानों को सब्सिडी दे रही है.

खेती में ड्रोन को बढ़ावा देने के लिए अधिकारिक तौर पर प्रशिक्षित होना जरूरी है. इसके लिए ड्रोन सर्टिफिकेशन हासिल करना होता है. ड्रोन संचालक को ऑफिशियल वेबसाइट डिजीटल स्काई पर जाकर ड्रोन सर्टिफिकेशन बड़ी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं. ड्रोन उड़ाने की इस प्रक्रिया के लिए 100 रुपये का आवेदन करना होता है.

देनी होगी 1000 रुपए फीस

जैसे वाहन चलाने के लिए लाइसेंस की जरूरत होती है. वैसे ही ड्रोन उड़ाने के लिए भी लाइसेंस जरूरी है। इसके लिए ड्रोन की टेस्ट ड्राइव होती है। फीस के तौर पर 1000 रुपये जमा करने होते हैं। आवेदन और टेस्ट ड्राइव की धनराशि मिलाकर कुल 1,100 रुपये जमा करने होते हैं। ड्रोन उड़ाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से योग्यता भी निर्धारित की गई है। कृषि ड्रोन उड़ाने के लिए 18 वर्ष से अधिक उम्र होनी चाहिए। इससे कम उम्र के लिए अनुमति नहीं दी गई है। 18 से कम उम्र के लिए सुविधा नहीं है।

केंद्र सरकार से मिलेगी सब्सिडी

केन्द्र सरकार ने किसान ड्रोन योजना शुरू की है. योजना के तहत 5 लाख रुपए तक के ड्रोन खरीदने पर 50 फीसदी तक सब्सिडी दी जाती है. सीमांत किसान, पूर्वाेत्तर राज्यों के किसान और महिला किसान ड्रोन सब्सिडी योजना के लिए पात्र होंगे। वहीं, अन्य किसानों को 4 लाख रुपये या इतनी ही लागत पर 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाती है। किसानो को दवाई डालने में बहुत मदद मिलेगी। व किसी भी प्रकर का छिड़काव कर सकते हैं।

मध्यप्रदेश में शुरू की गई पहल

वहीं पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में 120 से अधिक किसानों ने राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई व्यवस्था के अधीन ड्रोन उड़ाने की इजाजत मांगी है। प्रदेश सरकार न केवल किसानों को ड्रोन उड़ाने का लाइसेंस दिलाने में मदद कर रही है बल्कि उन्हें Agriculture Drone खरीदने और उसे उड़ाना सीखने का प्रशिक्षण लेने के लिए सब्सिडी भी उपलब्ध करा रही है। प्रदेश सरकार ने अमेठी स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी के साथ एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए हैं। नागर विमानन मंत्रालय के अधीन आने वाली यह स्वायत्त संस्था किसानों को ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण प्रदान करेगी। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक एक किसान को प्रशिक्षण देने पर 30,000 रुपये की लागत आएगी जिसे किसानों और सरकार के बीच आधा-आधा बांटा जाएगा।

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