रिजर्व बैंक ने बताया कि निजी कॉरपोरेट क्षेत्र को बैंकों से दिया जाने वाला ऋण सितंबर में 14.9 प्रतिशत की दर से बढ़ा जबकि साल भर पहले के समान महीने में यह 14.7 प्रतिशत था। केंद्रीय बैंक ने बैंक गतिविधियों के बारे में आंकड़ा जारी करते हुए यह जानकारी दी।
फिक्स्ड डिपॉजिट के आंकड़े: इन आकंड़ों के मुताबिक, छह-आठ प्रतिशत ब्याज दर वाली सावधि जमाओं यानी फिक्स्ड डिपॉजिट की हिस्सेदारी मार्च 2022 के 12.5 प्रतिशत के मुकाबले सितंबर, 2023 में बढ़कर 78.6 प्रतिशत हो गई। सितंबर के अंत में बैंकों में जमा पर जारी आंकड़ों से पता चलता है कि बढ़ती ब्याज दरों के कारण अधिक रिटर्न वाली जमा की ओर झुकाव हुआ। आरबीआई ने कहा कि उच्च रिटर्न के कारण फिक्स्ड डिपॉजिट में वृद्धि हुई। कुल जमा में एफडी की हिस्सेदारी सितंबर 2023 में लगभग 60 प्रतिशत हो गई जबकि मार्च 2023 में यह 57 प्रतिशत थी।
कितना है कर्ज डिमांड: आरबीआई आंकड़ों के मुताबिक सितंबर अंत में उद्योग जगत को दिया गया ऋण कुल बैंक ऋण का लगभग एक-चौथाई था। उद्योगों को दिए जाने वाले बैंक ऋण में सितंबर में सालाना आधार पर 8.6 प्रतिशत वृद्धि हुई। सितंबर, 2022 में इसकी वृद्धि दर 12.3 प्रतिशत थी।
रिजर्व बैंक ने कहा-सितंबर में निजी कॉरपोरेट क्षेत्र को बैंक ऋण में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर 14.9 प्रतिशत हो गई। एक तिमाही पहले यह 11.5 प्रतिशत और एक साल पहले 14.7 प्रतिशत थी। इसके मुताबिक, बैंक ऋण में व्यक्तिगत ऋण की हिस्सेदारी पांच साल पहले के 22 प्रतिशत से बढ़कर 30 प्रतिशत से अधिक हो गई है। कुल बैंक ऋण के साथ-साथ व्यक्तियों को दिए गए ऋण में महिला कर्जदारों की हिस्सेदारी भी बढ़ रही है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की तुलना में निजी क्षेत्र के बैंकों का कर्ज वितरण कहीं अधिक तेज है।
