शिवजी को प्रिय बेलपत्र सेहत के लिए है फायदेमंद

हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक महाशिवरात्रि इस साल 8 मार्च को मनाई जाएगी। इस त्योहार के दिन भगवान शिव की अराधना की जाती है। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस दिन भक्त भगवान शिव को खुश करने के लिए व्रत रखते हैं और सभी रीति-रिवाजों का पालन करते हुए शिवलिंग की पूजा करते हैं। इस दिन शिवभक्त भगवान को जल के साथ धतूरा, बेर और बेल के पत्ते चढ़ाते हैं।

कहते हैं कि बेलपत्र भगवान शिव का सबसे प्रिय पत्ता है। ये एक त्रिकोणीय पत्ता है, जो हिंदू धर्म में तीन मुख्य देवताओं भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। इसे आयुर्वेदिक जड़ी बूटी माना जाता है और जो कई बीमारियों से निपटने में मदद कर सकता है। यहां देखिए बेल पत्ते के फायदे-

फायदेमंद है पत्ता
बेल पत्ता कैल्शियम और फाइबर के साथ-साथ विटामिन ए, सी, बी1 और बी6 जैसे पोषक तत्वों से भरपूर है। ये पत्तियां कई स्वास्थ्य समस्याओं के लिए फायदेमंद होती हैं। रोजाना इस पत्ते को खाने से पेट से संबंधित समस्याओं में राहत मिलती है। हार्ट हेल्थ और लीवर को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

इम्यूनिटी होगी बूस्ट
हेल्दी रहने के लिए इम्यूनिटी का मजबूत होना बहुत जरूरी है। अगर आप बार-बार बीमार होते हैं तो आप रोजाना सुबह खाली पेट बेल पत्ता खाएं। इसमें  विटामिन सी होता है, जो इम्यूनिटी को मजबूत बनाने का काम करता है। रोजाना खाली पेट इस पत्ते को खाने से सर्दी-खांसी से बचाव होगा।

फाइबर से भरपूर
बेल पत्ते में फाइबर ज्यादा होता है, ऐसे में ये पेट के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। अगर आपको पेट से जुड़ी कोई समस्या है तो आप रोज सुबह खाली पेट बेल पत्ता खा सकते हैं। इसे खाने से गैस, एसिडिटी और अपच से छुटकारा मिल सकता है।  किसी को अगर कब्ज की समस्या है तो इस पत्ते को खाने से ठीक हो सकती है। ये पत्ता पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है।

कंट्रोल में रहता है ब्लड शुगर
डायबिटीज के मरीजों के लिए बेल पत्ता फायदेमंद माना जाता है। बेल पत्र में फाइबर और दूसरे पोषक तत्व होते है जो डायबिटीज पेशेंट के लिए जरूरी होते हैं। खाली पेट बेल पत्ता खाने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है।

कब खाएं ये पत्ता
रिपोर्ट्स का कहना है कि इस पत्ते को दिन में किसी भी समय खा सकते हैं। खाली पेट इसे खाने से अनगिनत फायदे मिल सकते हैं।

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