नई दिल्ली। शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश, ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने, मतदाता सूची तैयार करने, आधार संख्या, विवाह के पंजीकरण या सरकारी नौकरी में नियुक्ति के लिए एकल दस्तावेज के रूप में जन्म प्रमाण पत्र के उपयोग की अनुमति देने वाला जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2023 एक अक्टूबर से लागू होगा.
जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2023 को मानसून सत्र के दौरान संसद के दोनों सदन पारित किया गया था. सदन में विधेयक को पेश किए जाने के दौरान विपक्षी सांसदों ने विरोध दर्ज कराया था. संसद से विधेयक के पारित होने के बाद राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने 12 अगस्त को मंजूरी दी थी. इस संबंध में कानून और न्याय मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की गई थी.

जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक क्या है?
वर्तमान में जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के जरिए जन्म और मृत्यु के पंजीकरण किया जाता है. जन्म और मृत्यु का पंजीकरण समवर्ती सूची के अंतर्गत आता है. संसद और राज्य विधानसभाएं दोनों इस विषय पर कानून बनाने के लिए सक्षम हैं. 2019 तक, जन्म के पंजीकरण का राष्ट्रीय स्तर 93 फीसदी था और मृत्यु पंजीकरण 92 फीसदी था. विधि आयोग (2018) ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में विवाह पंजीकरण को शामिल करने की सिफारिश की थी.
जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2023 के जरिए पांच दशक से भी ज्यादा पुराने अधिनियम में संशोधन किया गया है. इसे 26 जुलाई को संसद के निचले सदन लोकसभा में पेश किया गया था. अब जबकि यह कानून बन गया है तो कई मामलों में जन्म प्रमाण पत्र का उपयोग अनिवार्य होगा. इससे ऐसे सभी मामलों में किसी व्यक्ति की उम्र और जन्म स्थान निर्धारित करने के लिए इसे एकमात्र मान्य प्रमाण के रूप में माना जाएगा. जन्म प्रमाण पत्र न होने का मतलब यह होगा कि कोई व्यक्ति वोट नहीं दे सकता, या स्कूल में प्रवेश, शादी या सरकारी नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सकता.
