रायपुर. छत्तीसगढ़ की साय सरकार का सुशासन तिहार केवल नीतियों तक सीमित न रह कर प्रदेश के जन-जीवन को छूते हुए एक संवेदनशील, जवाबदेह और परिणाममुखी व्यवस्था के रूप में सामने आ रहा है. इस परिवर्तन की धुरी बने हुए हैं राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, जिनके नेतृत्व में “सुशासन तिहार” ने शासन और जनता के बीच की दूरी को खत्म कर दिया है. छत्तीसगढ़ शासन का सुशासन तिहार आम नागरिकों के जीवन में आशा, विश्वास और विकास के नए अध्याय जोड़ रहा है.
समाधान का सशक्त माध्यम बन रहा प्रदेश का सुशासन तिहार
प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक साफ उद्देश्य और दूरदृष्टि के साथ “सुशासन तिहार” की शुरुआत की है. शासन को जनता के द्वार तक पहुंचाना और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना यही है इस कार्यक्रम का लक्ष्य जो आज हजारों लोगों के जीवन में बदलाव ला रही है. ग्राम पंचायत नाका के किसान गंगा प्रसाद खुसरो की कहानी सुशासन तिहार के सफलता का भी सजीव उदाहरण है. किसान किताब में त्रुटि के कारण गंगा प्रसाद को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था. सुशासन तिहार के तहत उन्होंने इस विषय में आवेदन दिया और राजस्व विभाग ने भी तत्परता दिखाते हुए उसका समाधान कर दिया. प्रशासन की त्वरित कार्रवाई, एक समस्या का समाधान नहीं बल्कि एक किसान के आत्मविश्वास को लौटाने का माध्यम बनी. गंगा प्रसाद की कहानी का सार यही है कि जब शासन संवेदनशील हो तो समस्याओं का बाधा, तूफान में तिनके की तरह उड़ जाता है.
सुशासन तिहार दे रहा अधूरे सपनों को नई उड़ान
इसी तरह मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत सेमरदर्री, ग्राम पंचायत नाका के भवन सिंह की कहानी भी बेहद प्रेरणादायक है. वर्षों से किसान किताब बनवाने की जी तोड़ कोशिश के बावजूद सफलता नहीं मिल पा रही थी. राज्य के सुशासन तिहार ने उनके भी सपने को साकार कर दिया. शिविर में ही उन्हें किसान किताब प्रदान कर दी गई इस घटना से आई उनके चेहरे की खुशी इस बात का प्रमाण थी कि अब प्रशासनिक जटिलताएं गए जमाने की बात बनती जा रही हैं. ग्राम सकोला की नीतू मार्को को मिलने वाली राहत भी सुशासन तिहार का गुणगान कर रही है. नीतू मार्को की किसान किताब को दीमक ने नष्ट कर दिया था जो एक गंभीर समस्या बन गई थी क्योंकि खेती से जुड़े सभी कार्य इससे प्रभावित हो रहे थे. सुशासन तिहार में आवेदन करते ही नीतू मार्को को नई किसान किताब उपलब्ध करा दी गई. समाधान की यह घटना बताती है कि शासन हर छोटी समस्या को भी गंभीरता से लेकर उसका निदान कर रहा है. प्रशासनिक कार्यशैली में आया यह बदलाव केवल दस्तावेज़ों तक सीमित नहीं है बल्कि लोगों के जीवन में भी यह नजर आ रहा है.
तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद सेवा का अदभुत उदाहरण

पेंड्रा विकासखंड के हेमंत कुमार का अनुभव सरकारी सेवाओं के प्रति कटु था मगर सुशासन तिहार से बदलते परिवेश में उन्हें मात्र 15 मिनट में ड्राइविंग लर्निंग लाइसेंस मिल गया. बिना लंबी कतारों, बिना किसी परेशानी के ऐसा हो पाना किसी दिवास्वप्न से कम नही था. त्वरित मिलने वाली ऐसी सेवाएं इस बात का संकेत है कि प्रशासन अब तकनीकी रूप से सक्षम और जनहित में प्रतिबद्ध हो चुका है. हेमंत जैसे युवा जब इस तरह के नए अनुभव से गुजरते हैं तो जैसा उनका विश्वास शासन में और मजबूत होता है उनका यही विश्वास एक सशक्त लोकतंत्र की नींव है.
दिव्यांगों को मिल रहा सहयोग का सहारा

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में समाज के हर वर्ग को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई जा रही हैं. समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत गौरेला जिले के प्राथमिक शाला डुमरिया की छात्रा कु. महेश्वरी की कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है. महेश्वरी, जो कभी चल भी नहीं पाती थी वही आज दौड़ने में सक्षम है और पढ़ाई में भी शानदार प्रदर्शन कर रही है. यह केवल एक छात्रा,महेश्वरी की ही सफलता नहीं है बल्कि उस व्यवस्था की जीत है जो हर बच्चे को समान अवसर देने में विश्वास रखती है. फिजियोथेरेपी सेंटर और विशेषज्ञों के समर्पण से मिलने वाली सफलताओं ने यह साबित कर दिया कि सही दिशा और समर्थन मिलने पर कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती.
प्रधानमंत्री आवास योजना से मिल रहा पक्का घर और सुरक्षित जीवन


प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पेंड्रा विकासखंड के ग्राम दमदम की भारती और ग्राम पंचायत देवरीखुर्द की कौशिल्या बाई जैसी महिलाओं के जीवन में जो बदलाव आया है वह सामाजिक सुरक्षा और सम्मान का प्रतीक है. छत्तीसगढ़ की साय सरकार में, वर्षों तक कच्चे घर में रहने वाली ये महिलाएं अब पक्के घर में सुरक्षित जीवन जी रही हैं. बारिश के दिनों में जो डर और असुरक्षा उनके जीवन का हिस्सा था वह अब पुरानी बात हो चुकी है. साथ ही साथ महतारी वंदन योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता इन महिलाओं के जीवन को और अधिक सुदृढ़ बना रहा है. भौतिक दिखाई देने वाला यह यह बदलाव मानसिक और सामाजिक स्तर पर भी बड़ा परिवर्तन ला रहा है. राज्य में साय सरकार के सुशासन ने महिलाओं को परिवर्तन की वह ऊँचाई दी है जहाँ अब महिलाएं आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य को स्पष्ट देख पा रही हैं.
सुशासन तिहार से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम


ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” के तहत गौरेला विकासखंड के ग्राम लालपुर के आश्रित ग्राम मंदपुर निवासी उषा राठौर की सफलता कहानी यह दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं. स्व सहायता समूह से जुड़कर उषा राठौर ने न केवल अपने व्यवसाय का विस्तार किया है बल्कि आज वे हर महीने 10-12 हजार रुपये की आय भी अर्जित कर रही हैं. यह आय उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है और उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में उठाए जा रहे ऐसे कदम महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही हैं.
दिव्यांगों के जीवन में आई गतिशीलता

जनपद पंचायत मरवाही के ग्राम पंचायत कटरा निवासी स्वरूप सिंह पोर्ते की कहानी संवेदनशील शासन का एक जोरदार उल्लेखनीय उदाहरण है. 80 प्रतिशत दिव्यांग होने के कारण स्वरूप सिंह दैनिक कार्यों में असहाय थे. लेकिन सुशासन तिहार के शिविर में उन्हें व्हील चेयर उपलब्ध करा कर सक्षम बनाया गया. अब वे अपना सभी काम करते हुए स्वावलंबी बनकर आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रहे हैं. स्वरूप सिंह पोर्ते को मिलने वाला यह शासकीय सहयोग उनके लिए केवल एक उपकरण नहीं बल्कि स्वतंत्रता का प्रतीक है.
सुशासन तिहार से बने विष्णुदेव साय, एक नई पहचान वाले जन-नेता
सफलता की इन सभी कहानियों के केंद्र में जो बात स्पष्ट रूप से उभरकर आती है वो है मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कुशल नेतृत्व. राज्य के मुखिया का दृष्टिकोण केवल दूरदर्शिता के साथ प्रशासन चलाने के अलावा प्रदेश की जनता के जीवन को बेहतर बनाने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं. राज्य के मुख्यमंत्री की नीतियों में संवेदनशीलता, त्वरित निर्णय और कार्यों में पारदर्शिता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. सुशासन तिहार जैसे आयोजन इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण हैं कि राज्य के मुखिया जन-सामन्य की समस्याओं को समझ कर उसके समाधान के लिए तत्पर रहते हैं.
छत्तीसगढ़ आज जिस नई दिशा में आगे बढ़ रहा है वहाँ शासन सिर्फ़ आदेशक नही होगा वह जनता का सेवकि भी होगा. गंगा प्रसाद, भवन सिंह, हेमंत, नीतू मार्को, महेश्वरी, भारती, कौशिल्या, उषा राठौर और स्वरूप सिंह जैसी कहानियां छत्तीसगढ़ सरकार के इस नए तेवर की गवाही दे रही हैं. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दिशा निर्देश और नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में जो सुशासन की विलक्षण परंपरा विकसित हो रही है वह आने वाले समय में पूरे देश के लिए एक अदभुत उदाहरण बन सकती है.