सांस लेने में नहीं होगी कोई दिक्कत, अस्थमा पीड़ित बच्चे की लाइफ आसान बनाने के लिए पेरेंट्स अपनाएं ये टिप्स

अस्थमा सांस से जुड़ी एक क्रोनिक बीमारी है, जिसमें पीड़ित की सांस की नली सूजकर संकरी हो जाती है। नतीजतन, पीड़ित व्यक्ति को खांसी, खराश, सांस फूलने जैसी शिकायत के साथ छाती में जकड़न महसूस हो सकती है। हालांकि इसके पीछे भी अनेक कारण हो सकते हैं, जिनमें एलर्जी, सांस की नली में संक्रमण, व्यायाम की अधिकता, और जलन उत्पन्न करने वाले पदार्थों का संपर्क शामिल होता है। चिंता की बात यह है कि बच्चों के अस्थमा की चपेट में आने की संभावना ज्यादा होती है, क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित हो रही होती है। वास्तव में अस्थमा के शिकार लगभग 80 प्रतिशत बच्चों को पहले 6 साल में इसके लक्षण दिखने लगते हैं।

मौसम में परिवर्तन अस्थमा के लक्षणों को और ज्यादा बढ़ा सकता है, जिससे बच्चों की स्थिति बिगड़ सकती है। अत्यधिक नमी, बारिश आदि के मौसम में हर हफ्ते काफी संख्या में बच्चे अस्पतालों में भर्ती हुआ करते हैं। यही वजह है कि बदलते मौसम में अस्थमा पीड़ित बच्चों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए अस्थमा एक्शन प्लान लेना बहुत जरूरी हो जाता है। ऐसे में फोर्टिस मैमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम की डॉ. नीतू तलवार, (एडिशनल डायरेक्टर, पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजी विभाग ) से जानते हैं आखिर कैसे उचित मार्गदर्शन और आवश्यक टूल्स और उनके उपायों के बारे में जानकारी लेने से अस्थमा के लक्षणों को नियंत्रित करके सेहतमंद बने रहने में भी मदद मिलती है।

क्या है अस्थमा एक्शन प्लान ?
अस्थमा एक्शन प्लान एक लिखित दस्तावेज होता है, जो अस्थमा के लक्षणों को नियंत्रित करने, उसे बिगड़ने से रोकने, और आपात स्थिति उत्पन्न न होने देने के उपायों की रूपरेखा तैयार करता है। यह प्लान आम तौर से डॉक्टर की मदद से बनाया जाता है, जिसमें पीडियाट्रिशियन और अस्थमा विशेषज्ञ बच्चे की व्यक्तिगत जरूरतों और ट्रिगर्स के आधार पर रूपरेखा तैयार करते हैं। अस्थमा पीड़ित बच्चे डे केयर में हों, स्कूल में, या आफ्टरकेयर प्रोग्राम में, उन्हें स्वस्थ रखने के लिए केयरगिवर्स के साथ अस्थमा एक्शन प्लान साझा करना बहुत आवश्यक होता है। इन प्लांस को आमतौर पर तीन जोन में बांटा गया है, जिनमें से हर एक किसी न किसी विशेष उद्देश्य को पूरा करते हैं।

ग्रीन जोन-
यह वो आदर्श स्थिति है, जिसमें अस्थमा के लक्षण नियंत्रण में रहते हैं, और डॉक्टर के परामर्श से दीर्घकालिक दवाईयां चलती रहती हैं। ग्रीन ज़ोन के मरीज पूरे विश्वास के साथ इलाज की नियमित दिनचर्या का पालन कर सकते हैं।

यलो जोन-
इस स्थिति में अस्थमा के लक्षण मौजूद रहते हैं। इस चरण में डॉक्टर के परामर्श से शीघ्र आराम देने वाली दवाईयां लेते रहना चाहिए। मरीजों को यलो जोन के बारे में जागरुक रहना चाहिए और लक्षणों को प्रभावी रूप से नियंत्रित करने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।

रेड जोन- 
इस स्थिति में अस्थमा के लक्षण बिगड़े हुए होते हैं, और अस्थमा के दौरे पड़ते हैं। रेड जोन के मरीजों के लिए अस्थमा एक्शन प्लान होना बहुत जरूरी है, और यदि लक्षणों में सुधार न हो, तो तुरंत मेडिकल इलाज कराना चाहिए। इस परिस्थिति में मरीजों को स्थिति की गंभीरता को समझकर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
डॉक्टर पीक फ्लो रेट टेस्ट की मदद से यह देखते हैं कि व्यक्ति कितनी सांस को फोर्स के साथ फेफड़ों से बाहर फेंक सकता है। इससे यह आकलन करने में मदद मिलती है कि व्यक्ति के फेफड़े ठीक से काम कर रहे हैं।

बच्चों के लिए अस्थमा एक्शन प्लान जरूरी क्यों है?
बच्चों को समर्थ बनाने के लिए-

बच्चों को अस्थमा के नियंत्रण की प्रक्रिया में शामिल करने से उनमें अपनी सेहत को लेकर जिम्मेदारी व सावधानी रखने की भावना का विकास होता है। अपनी स्थिति को समझकर और अस्थमा को नियंत्रण में रखने के लिए जरूरी उपाय करके बच्चे अपनी देखभाल में सक्रियता से हिस्सा ले सकते हैं। इस तरह से उनमें आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता, और अस्थमा पर नियंत्रण की भावना विकसित होती है, जिससे उनके आत्मसम्मान और जीवन की गुणवत्ता में सुधार आता है।

स्थिति को बिगड़ने से रोकें-
अस्थमा एक्शन प्लान अस्थमा के लक्षणों को बिगड़ने और अस्थमा का दौरा पड़ने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह बच्चों और उनके केयरगिवर्स को स्पष्ट रोडमैप प्रदान करता है, और उन्हें दैनिक दवाईयों की दिनचर्या, ट्रिगर्स, जिनसे बचाव करना है, और लक्षणों को नियंत्रित करने की रणनीतियों के बारे में बताता है। यह सक्रिय दृष्टिकोण अस्थमा के बिगड़ने, अस्पताल में भर्ती होने, और आपातकालीन कक्ष में भर्ती होने की संभावना को काफी कम कर देता है, जिससे बच्चे ज्यादा स्वस्थ, ज्यादा स्थिर जीवन व्यतीत करने में समर्थ बनते हैं।

कस्टमाईज़्ड केयर-
हर बच्चे को अस्थमा के लिए व्यक्तिगत देखभाल की जरूरत होती है, जो उनके लिए व्यक्तिगत एक्शन प्लान द्वारा संभव होता है। एक सुव्यवस्थित प्लान में उस बच्चे में लक्षण ट्रिगर करने वाले तत्वों, लक्षणों के प्रकार, और दवाईयों का विवरण तैयार किया जाता है। इससे लक्षणों के आधार पर डॉक्टर के परामर्श से दवाईयों की खुराक को एडजस्ट करने का रास्ता मिलता है, और घर, स्कूल, या शारीरिक गतिविधियों के दौरान संपर्क में आने वाले ट्रिगर्स से बचने के उपाय मिलते हैं।

शिक्षा और जागरुकता बढ़ाएं-
अस्थमा एक्शन प्लान न केवल बच्चों, बल्कि उनके परिवारों, केयर गिवर्स, टीचर्स, और साथियों के लिए शिक्षा व जागरुकता को बढ़ावा देता है। यह एक शिक्षाप्रद टूल है, जो सुनिश्चित करता है कि बच्चे की देखभाल में शामिल हर व्यक्ति बच्चे की स्थिति, लक्षण बिगाड़ने वाले ट्रिगर्स, और इस स्थिति में उचित प्रतिक्रियाओं के बारे में जानता हो। यह एक सहयोगपूर्ण वातावरण का विकास करता है, जिसमें बच्चे के करीबी लोग अस्थमा के लक्षणों को पहचानकर तुरंत प्रभावशाली उपाय कर सकें। इसके अलावा जागरुकता बढ़ने से अस्थमा से जुड़े भ्रम और कलंक दूर करने में मदद मिलती है, और बच्चों के लिए एक अच्छे वातावरण का निर्माण होता है, जिसमें वो आगे बढ़ते हुए अपने शैक्षणिक और सामाजिक उद्देश्य प्राप्त कर सकें।

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