Mahadev Satta App केस: प्रमोटर Saurabh Chandrakar की 1700 करोड़ की संपत्ति अटैच, सट्टे के पैसों से Burj Khalifa में खरीदा था अपार्टमेंट

रायपुर. ईडी (ED) ने महादेव ऑनलाइन बुक सट्टेबाजी मामले में मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर की 1700 करोड़ रुपये की भारतीय और विदेशी संपत्तियां जब्त की है . प्रवर्तन निदेशालय (ED), रायपुर जोनल कार्यालय ने 24 मार्च को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत एक अस्थायी जब्ती आदेश (PAO) जारी किया है. इस आदेश के तहत दुबई (UAE) में स्थित 18 अचल संपत्तियां और नई दिल्ली में स्थित 2 अचल संपत्तियां जब्त की गई हैं, जिनका बाजार मूल्य लगभग 1700 करोड़ रुपये है.

जब्त की गई विदेशी संपत्तियां दुबई के प्रमुख स्थानों पर स्थित हैं और इनमें दुबई हिल्स एस्टेट (जिसमें हिल्स व्यू, फेयरवे रेजिडेंसी और सिदरा शामिल हैं) में स्थित उच्च-मूल्य वाले लक्जरी विला और अपार्टमेंट शामिल हैं. इसके अलावा, बिजनेस बे और SLS होटल एंड रेजिडेंस में कई हाई-एंड अपार्टमेंट और प्रतिष्ठित बुर्ज खलीफा में भी अपार्टमेंट शामिल हैं. जब्ती के लिए चुनी गई ये संपत्तियां महादेव ऑनलाइन बुक सट्टेबाजी एप्लिकेशन के मुख्य प्रमोटरों में से एक, सौरभ चंद्राकर की हैं. ये संपत्तियां उसके द्वारा नियंत्रित संस्थाओं और उनके सहयोगियों, जिनमें विकास छपारिया, रोहित गुलाटी, अतुल अरोड़ा, नितिन टिबरेवाल और सुरेंद्र बागड़ी शामिल हैं, के नाम पर दर्ज हैं. ED द्वारा की गई जांच से पता चला है कि ये संपत्तियां महादेव ऑनलाइन बुक प्लेटफ़ॉर्म और कई अन्य प्लेटफ़ॉर्म के नाम पर चलाए जा रहे अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी अभियानों से संबंधित अपराधों से अर्जित आय (Proceeds of Crime) से खरीदी गई थीं.

ED ने छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में पुलिस अधिकारियों द्वारा दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी. ये एफआईआर IPC, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफ़ॉर्म—जैसे महादेव ऑनलाइन बुक, Skyexchange आदि—से जुड़े व्यक्तियों और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई थीं. ED द्वारा की गई जांच से यह भी पता चला है कि महादेव ऑनलाइन बुक एक बड़े पैमाने पर चलने वाले अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी सिंडिकेट के रूप में काम करता था. यह सिंडिकेट Tiger Exchange, Gold365 और Laser247 जैसे कई ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म और डोमेन नामों के माध्यम से अवैध सट्टेबाजी की सुविधा प्रदान करता था. इस ऑपरेशन को “पैनलों” या “शाखाओं” के एक फ़्रैंचाइज़ी-आधारित नेटवर्क के ज़रिए चलाया गया, जिनका संचालन पूरे भारत में मौजूद सहयोगियों द्वारा किया जाता था. वहीं, इसके मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्रकार और रवि उप्पल दुबई से इस सट्टेबाजी सिंडिकेट को संचालित और नियंत्रित करते थे.

जांच में आगे पता चला कि प्रमोटरों ने बेटिंग पैनल से होने वाले मुनाफे का लगभग 70-75% हिस्सा अपने पास रख लिया, जबकि बाकी हिस्सा उन पैनल ऑपरेटरों में बांट दिया गया, जो बेटिंग के काम को संभाल रहे थे. तय अपराधों से कमाए गए ‘अपराध से प्राप्त धन’ (PoC) को हज़ारों ‘म्यूल्स’ (बिचौलियों) या नकली बैंक खातों के जरिए व्यवस्थित तरीके से घुमाया गया. ये खाते ऐसे लोगों के KYC दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करके खोले गए थे, जिन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी. इसके बाद, इस अवैध पैसे को हवाला चैनलों, क्रिप्टोकरेंसी लेन-देन और जटिल वित्तीय तरीकों से भारत के बाहर भेजा गया, और आखिरकार UAE और भारत में कीमती चल और अचल संपत्तियों में निवेश किया गया.

अब तक, ED ने इस मामले के सिलसिले में पूरे देश में 175 से ज्यादा जगहों पर तलाशी अभियान चलाए हैं. इसके अलावा, इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 74 लोगों को रायपुर की विशेष अदालत (PMLA) में दायर पांच ‘अभियोजन शिकायतों’ में आरोपी बनाया गया है. साथ ही, ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018’ के तहत सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल, अनिल अग्रवाल (उर्फ अतुल अग्रवाल) और शुभम सोनी के खिलाफ आवेदन दायर किए गए हैं, ताकि उन्हें ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ घोषित किया जा सके और उनकी संपत्तियों को ज़ब्त किया जा सके. आज की तारीख तक, चल और अचल संपत्तियों की कुल की लगभग 4336 करोड़ रुपये है. ED अवैध बेटिंग के काम से कमाए गए ‘अपराध से प्राप्त धन’ का पता लगाने और उसे ज़ब्त करने के लिए भी लगातार कार्रवाई कर रही है.

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