एस्ट्रोटर्फ की समस्या से जूझ रही हॉकी नर्सरी—राशि स्वीकृत होने के छह महीने बाद भी विभाग टेंडर जारी नहीं कर पाया

राजनांदगांव। लोक निर्माण विभाग में चल रहीं अफसरशाही अब जिले में भारी पड़ने लगी है. अफसरों की उदासीनता और निरंकुशता के चलते हॉकी की नर्सरी एस्ट्रोटर्फ की समस्या से जूझ रही है. राशि स्वीकृत हुए छह महीने बीत गए हैं, लेकिन आज पर्यंत टेंडर नहीं लग पाया है. कमोबेश यही हाल बजरंगपुर नवागांव में प्रस्तावित सिथटेक्स एथलेटिक्स ट्रेक का भी होकर रह गया है.

मिली जानकारी के अनुसार, गौरवपथ के किनारे बनाए गए अंतर्राष्ट्रीय हॉकी मैदान में लगाया गया एस्ट्रोटर्फ तकरीबन 15 साल पुराना हो गया है. इस एस्ट्रोटर्फ को बदलने के लिए राज्य शासन द्वारा तकरीबन 6 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिल चुकी है. यह स्वीकृति हुए 6 महीने से अधिक समय बीत चुका है. इन 6 महीनों में राजनांदगांव का लोक निर्माण विभाग एस्ट्रोटर्फ का नया टेंडर नहीं लगा पाया है, जिसके कारण देश की प्राचीनतम प्रतियोगिताओं में से एक महंत सर्वेश्वरदास हॉकी प्रतियोगिता के आयोजन में बाधा बनी हुई है. इस प्रतियोगिता का आयोजन विगत तीन वर्षों से नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण हॉकी की नर्सरी के खिलाड़ी आयोजन से दूर होते चले जा रहे हैं.

नाराज खिलाड़ियों एवं खेल प्रेमियों ने लोक निर्माण विभाग की गतिविधियों को लेकर अपनी कड़ी नाराजगी जताई है. इसी तरह खेल के लिए ही एस्ट्रोटर्फ के पहले सिंथटेक्सि एथलेटिक्स ट्रेक की स्वीकृति राज्य सरकार द्वारा की गई थी. तकरीबन इस स्वीकृति को एक साल होने जा रहे हैं. 7 करोड़ के आसपास राशि की स्वीकृति की गई थी. लंबे अरसे बाद बजरंगपुर नवागांव के स्टेडियम में ट्रैक बनाने का प्रस्ताव पास किया गया लेकिन यहां भी पीडब्ल्यूडी अफसरों की लालफीताशाही भारी पड़ी और एक साल में टेंडर भी नहीं लगाया जा सका है. इतनी बड़ी लापरवाही के लिए जिम्मेदारी किसकी है, यह भी तय नहीं हो पाया है.

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