पूर्व अमेरिकी राजनयिक लिंडसे फोर्ड ने ट्रंप प्रशासन को आगाह किया है कि भारत पर रूस के साथ संबंध तोड़ने के लिए दबाव बनाना आत्मघाती हो सकता है. उन्होंने ये भी कहा कि जब तक अमेरिका भारत के सैन्य विकल्पों की पूर्ति नहीं करता, तब तक भारत का रूस का साथ छोड़ना संभव नहीं है. पूर्व अमेरिकी राजनयिक और दक्षिण एशिया विशेषज्ञ लिंडसे फोर्ड ने भारत पर रूस से रक्षा और रणनीतिक संबंधों को कम करने के लिए दबाव डालने के खिलाफ चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अमेरिका को समझना होगा कि अगर भारत से रूस से विविधीकरण (diversify away) करने को कहा गया तो इससे भारत की सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है.
पूर्व अमेरिकी राजनयिक और दक्षिण एशिया विशेषज्ञ लिंडसे फोर्ड ने मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को बड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका को भारत पर रूस के साथ संबंध खत्म करने के लिए दबाव नहीं बनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अमेरिका को ऐसा नहीं करना चाहिए.
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका भारत को रूस से दूर होने के लिए कहता है तो इससे भारत के लिए गंभीर सुरक्षा चुनौतियां पैदा हो सकती हैं.
फोर्ड के अनुसार, यदि अमेरिका सैन्य उपकरणों की आपूर्ति में आगे नहीं बढ़ता है तो उसे भारत से रूस का साथ छोड़ने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए. उनका ये बयान भारत-अमेरिका संबंधों और रूस पर लगे प्रतिबंधों के बीच सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए आया है.
लिंडसे फोर्ड ने तर्क दिया कि अमेरिका को ये समझने की जरूरत है कि रूस से विविधता (diversify) अपनाने का मतलब भारत के लिए वास्तविक भेद्यता या कमजोरी पैदा करना है. भारत अपनी सैन्य जरूरतों के लिए लंबे वक्त से रूस पर निर्भर रहा है. ऐसे में अचानक संबंधों में कटौती करना भारत की रक्षा तैयारियों को खतरे में डाल सकता है.
लिंडसे फोर्ड का मानना है कि अमेरिका को भारत की इन मजबूरियों और सुरक्षा जरूरतों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए. फोर्ड ने जोर देकर कहा कि अगर अमेरिका चाहता है कि भारत रूस पर अपनी निर्भरता कम करे तो उसे खुद सैन्य क्षेत्र में एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में आगे आना होगा. हालांकि, भारत सरकार ने अमेरिका के साथ अंतरिम ट्रेड डील की पु्ष्टि की है, लेकिन रूस से तेल खरीद बंद करने के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है.
