भारतपुर पंचायत में डस्टबिन खरीदी पर सवाल : ₹1.76 लाख खर्च का दावा, ग्रामीणों को अब तक एक भी डस्टबिन नहीं मिला

टूल किट के नाम पर भी ₹1 लाख की राशि; स्वच्छता दीदियों के काम नहीं करने के दावे से व्यवस्था पर उठे सवाल

सीतापुर। जनपद पंचायत सीतापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत भारतपुर  में डस्टबिन खरीदी और स्वच्छता से जुड़ी सामग्री पर खर्च की गई राशि को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उपलब्ध भुगतान विवरण के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में डस्टबिन खरीदी के नाम पर चार अलग-अलग भुगतान आदेशों के जरिए कुल ₹1,76,035 का भुगतान दर्शाया गया है। दूसरी ओर ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत क्षेत्र में आज तक एक भी डस्टबिन वितरित नहीं किया गया है।

भारतपुर ग्राम पंचायत की जनसंख्या लगभग 1,545 बताई जा रही है, जबकि पंचायत क्षेत्र में करीब 520 राशन कार्ड होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में इतनी बड़ी राशि से खरीदे गए बताए जा रहे डस्टबिन की संख्या, उनकी कीमत, साइज और वर्तमान स्थिति को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

चार भुगतान आदेशों में ₹1.76 लाख

उपलब्ध भुगतान विवरण के अनुसार—

X VFC/2025-26/P/5 — 31 अगस्त 2025 — ₹26,315

 

X VFC/2025-26/P/6 — 31 अगस्त 2025 — ₹49,860

 

X VFC/2025-26/P/10 — 12 सितंबर 2025 — ₹49,860

 

X VFC/2025-26/P/12 — 26 मार्च 2026 — ₹50,000

इन चारों भुगतानों को जोड़ने पर कुल राशि ₹1,76,035 होती है।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इन भुगतानों के बदले वास्तव में डस्टबिन खरीदे गए हैं तो डस्टबिन गए कहां?

लगभग एक साल बाद भी ग्रामीणों को वितरण नहीं

ग्रामीणों के अनुसार पंचायत में आज तक डस्टबिन का वितरण नहीं हुआ है। यदि सामग्री खरीदी गई है और पंचायत के पास उपलब्ध है तो पंचायत को यह बताना चाहिए कि डस्टबिन वर्तमान में किस स्थान पर रखे गए हैं, उनकी कुल संख्या कितनी है और उनका वितरण कब किया जाएगा।

वहीं यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि एक डस्टबिन की खरीद दर कितनी थी और कुल कितने डस्टबिन खरीदे गए। क्या खरीदी के लिए कोटेशन, बिल-वाउचर, सप्लाई ऑर्डर, जीएसटी बिल और स्टॉक रजिस्टर में आवश्यक प्रविष्टियां की गई हैं?

टूल किट के नाम पर भी ₹1 लाख का भुगतान?

डस्टबिन खरीदी के अलावा पंचायत में टूल किट के नाम पर करीब ₹1 लाख की राशि खर्च किए जाने की बात भी सामने आ रही है। ग्रामीणों का दावा है कि पंचायत क्षेत्र में वर्तमान में स्वच्छता दीदियां काम करती हुई दिखाई नहीं देतीं।

ऐसे में सवाल उठता है कि यदि टूल किट खरीदी गई है तो किसके लिए खरीदी गई, कितनी संख्या में खरीदी गई, किस दर पर खरीदी गई और उसका वितरण किन हितग्राहियों या स्वच्छता कर्मियों को किया गया?

यदि टूल किट खरीदी गई है तो उसका भौतिक सत्यापन और स्टॉक रजिस्टर का मिलान भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।

क्या कागजों तक सीमित रह गई खरीदी?

डस्टबिन और टूल किट की खरीदी को लेकर ग्रामीणों की ओर से यह आशंका जताई जा रही है कि कहीं रिकॉर्ड में दर्शाई गई खरीदी और वास्तविक सामग्री की मात्रा में अंतर तो नहीं है।

हालांकि यह फिलहाल आरोप और आशंका है। इसे सत्य मानने से पहले संबंधित दस्तावेजों और सामग्री का भौतिक सत्यापन आवश्यक है। जांच में यह देखा जाना चाहिए कि भुगतान की गई पूरी राशि के अनुरूप सामग्री वास्तव में पंचायत को मिली या नहीं।

 

सरपंच संघ अध्यक्ष की पंचायत में पारदर्शिता पर सवाल

ग्राम पंचायत भारतपुर की सरपंच दसनी बाई के संबंध में यह भी उल्लेखनीय है कि उन्हें सरपंच संघ की अध्यक्ष बताया जा रहा है। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में होने वाले विकास और खरीदी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही का उदाहरण प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

ग्रामीणों की मांग है कि डस्टबिन और टूल किट खरीदी की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा खरीदी से संबंधित सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं।

जांच में सामने आ सकती है वास्तविक तस्वीर

मामले की जांच के दौरान बिल-वाउचर, जीएसटी चालान, कोटेशन, स्वीकृति आदेश, भुगतान आदेश, स्टॉक रजिस्टर, सप्लाई रजिस्टर और मौके पर उपलब्ध सामग्री का मिलान किया जाए तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

जांच से यह भी पता चल सकेगा कि ₹1,76,035 के डस्टबिन और करीब ₹1 लाख की टूल किट वास्तव में खरीदी गई है या नहीं, खरीदी गई है तो कितनी मात्रा में और वर्तमान में वह सामग्री कहां मौजूद है।

फिलहाल ₹1.76 लाख की डस्टबिन खरीदी और करीब ₹1 लाख की टूल किट खरीदी को लेकर उठे सवालों का जवाब पंचायत प्रशासन को दस्तावेजों के साथ देना चाहिए। वित्तीय अनियमितता या गबन का निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।

इस संबंध में सरपंच के गोलमोल जवाब है, जबकि सचिव और संबंधित आपूर्तिकर्ताओं का पक्ष इस  सामने नहीं आया है।