आदेश के बावजूद सड़क की हालत नहीं सुधरी, हाईकोर्ट ने सरकार, NHAI और नगर निगम के रवैये पर जताई नाराजगी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य में सड़कों की बदहाली को लेकर सरकार, एनएचएआई और बिलासपुर नगर निगम के कामकाज पर गहरी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्रा और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने कहा कि सड़कें बनाना और उनकी मरम्मत करना संबंधित एजेंसियों का काम है, कोर्ट का नहीं विभागों का कोर्ट के आदेश के बाद ही सक्रिय होना उचित नहीं है।

कोर्ट ने रायपुर जाते समय एयरपोर्ट मार्ग पर धनेली से पुराना विधानसभा रोड की स्थिति पर भी संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव से 8 अप्रैल 2025 के आदेश के पालन की जानकारी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई दिवाली के बाद नवंबर में होगी। सड़क संबंधी दो जनहित याचिकाओं की सुनवाई में आज कोर्ट ने कहा कि, वर्ष 2021 से मामला लंबित होने के बावजूद, खासकर बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की सड़कों की हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ है।

पिछली सुनवाई में नगर निगम की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं होने पर कोर्ट ने आयुक्त को अगली तारीख पर स्वयं या अपने प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित रहने का निर्देश दिया था। ऐसा नहीं करने पर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।

एनएचएआई के शपथपत्र पर हैरानी जताई

हाईकोर्ट ने एनएचएआई के शपथपत्र पर हैरानी जताई कि मोपका – सेंदरी बाईपास अब तक एनएचएआई को हस्तांतरित नहीं हुआ है और सड़क के संचालन व रखरखाव की जिम्मेदारी अभी भी राज्य के पीडब्ल्यूडी के पास है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार परियोजना पूरी करने या उसे एनएचएआई को सौंपने में रुचि नहीं ले रही है।

राज्य सरकार को पीडब्ल्यूडी सचिव का शपथपत्र दाखिल करने तथा एनएचएआई के रायपुर और बिलासपुर परियोजना अधिकारियों को बिलासपुर-रायपुर परियोजना पूरी होने की समयसीमा स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।

समय रहते ठीक करें सड़कें

न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव ने बिलासपुर की सड़कों की बदहाली पर चिंता जताते हुए त्योहारों के दौरान दुर्घटनाओं और लोगों के घायल होने की आशंका व्यक्त की थी। कोर्ट ने नगर निगम आयुक्त से सड़कों की मरम्मत के लिए उठाए गए कदमों का विवरण शपथपत्र में देने को कहा है। सुनवाई में न्यायमित्र राजीव श्रीवास्तव, अधिवक्ता प्रतीक शर्मा और आशुतोष कछवाहा सहित विभिन्न पक्षों के वकील उपस्थित रहे। हाईकोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया कि सड़क सुधार के लिए संबंधित विभागों को न्यायालय के आदेश का इंतजार करने के बजाय समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए।