रायपुर। राजधानी में बिक रहे घी की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने अलग-अलग इलाकों से घी के 12 नमूने लेकर भोपाल की प्रयोगशाला भेजे थे। रिपोर्ट में छह नमूने निर्धारित खाद्य मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए, इनमें अमूल, वचन, देवभोग, कीर्ति गोल्ड प्योर काऊ घी, देशी घी धौलपुर और वास्तु एगमार्क घी शामिल हैं।
सभी नमूनों में लेड की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक मिली है। जबकि वास्तु एगमार्क घी में लेड के साथ बीआर रीडिंग और आयोडीन वैल्यू भी अधिक मिली। इसमें वनस्पति फैट की मौजूदगी भी सामने आई है। विभाग ने 15 से 30 अगस्त के बीच डूंडा – कौशल्या विहार, डूमरतराई, टेमरी और गोबरा नवापारा से नमूने लिए थे। ये सैंपल एवेन्यू सुपर मार्केट, बालाजी ट्रेडिंग, मयंक ट्रेडिंग, मयंक एजेंसी और शुभम् मार्ट से लिए गए थे।
तीन ब्रांड के सैंपल मानकों पर खरे उतरे
खाद्य विभाग के अधिकारी के अनुसार, कुल 12 घी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। इनमें अनिक घी, गोवर्धन घी और श्रीमूल घी के सैंपल मानकों के अनुरूप पाए गए हैं। वहीं श्री खाटू श्याम प्योर काऊ घी और गाय का घी के सैंपल की जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली है। इन दोनों सैंपलों की रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। अन्य सैंपलों की रिपोर्ट के आधार पर विभाग आगे की कार्रवाई कर रहा है।
पांच नमूनों में लेड की मात्रा ज्यादा
अधिकारी के अनुसार, घी में लेड की निर्धारित सीमा 0.02 mg/kg है। जांच में अमूल में 0.037 में mg/kg, वचन में 0.161 mg/kg, देवभोग में 0.035 mg/kg, कीर्ति गोल्ड में 0.192 mg/kg और देशी धौलपुर में 0.043 mg/kg लेड मिला। यानी पांचों नमूनों में लेड की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक रही।

वचन के नमूने में यह मात्रा तय सीमा से करीब आठ गुना और कीर्ति गोल्ड में करीब 9.6 गुना अधिक रही। अमूल, देवभोग और देशी घी धौलपुर में भी लेड निर्धारित सीमा से ऊपर मिला है। वास्तु एगमार्क घी के नमूने में लेड 0.154 mg/kg पाया गया, जबकि निर्धारित सीमा 0.02mg/kg है। इसके अलावा बीआर रीडिंग और आयोडीन वैल्यू भी अधिक पाई गई।
जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट का मानना है कि लंबे समय तक लेड का सेवन क्रॉनिक लेड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है। इसके शुरुआती लक्षणों में पेट दर्द, पेट में मरोड़ और कब्ज शामिल हैं। लगातार लेड के संपर्क में रहने से मांसपेशियों, हड्डियों और मस्तिष्क पर असर पड़ सकता है। बच्चों में चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी और गंभीर मामलों में तंत्रिका तंत्र संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। गर्भवती महिलाओं में भी इसका दुष्प्रभाव हो सकता है।
अधिक लेड से किडनी-मस्तिष्क को नुकसान
घी में लेड की मात्रा निर्धारित मानक 0.2 के भीतर होनी चाहिए। यदि किसी खाद्य पदार्थ में लेड की मात्रा तय सीमा से अधिक पाई जाती है तो यह गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा की चिंता का विषय है। लंबे समय तक अधिक मात्रा में लेड का सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसका असर किडनी और मस्तिष्क सहित शरीर के विभिन्न अंगों पर पड़ सकता है।