मुंगेली. छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में नाबालिग के मर्डर केस में आखिरकार दोनों आरोपियों के जेल दाखिल कर दिया गया है. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) न्यायालय ने आरोपियों का न्यायिक रिमांड खारिज कर दिया था. राज्य शासन ने CJM के आदेश को अपर सत्र न्यायालय में चुनौती दी. प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ने पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए 29 अक्टूबर को पूर्व आदेश निरस्त कर दिया. जिसके बाद आरोपियों को कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया.
CJM कोर्ट से रिमांड खारिज, आरोपियों की रिहाई से बढ़ी परिवार की चिंता!
ग्राम नेवासपुर में 17 वर्षीय नाबालिग बालिका की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की सूचना 20 अक्टूबर 2026 को पुलिस को मिली थी. सिटी कोतवाली पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की. घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और गवाहों के कथनों के आधार पर अपराध क्रमांक 343/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 में हत्या का मामला दर्ज किया गया.
पुलिस ने जांच के दौरान अजीत घृतलहरे और साहिल खाण्डे को गिरफ्तार किया. दोनों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड की मांग की गई, लेकिन CJM न्यायालय ने रिमांड आवेदन स्वीकार नहीं किया. न्यायालयीन आदेश में गिरफ्तारी से संबंधित प्रक्रिया और दस्तावेजों में कमियों का उल्लेख किया गया था. उपलब्ध आदेश के अंश के अनुसार, कथन दर्ज किए जाने के समय का उल्लेख नहीं होने सहित प्रक्रियागत बिंदुओं पर सवाल उठे. न्यायालय ने विवेचना अधिकारी प्रशिक्षु उपनिरीक्षक नवीन कुमार से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश भी दिया. दोनों आरोपियों को 25-25 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र पर छोड़े जाने का आदेश हुआ. इस घटनाक्रम के बाद पीड़ित परिवार की चिंता बढ़ गई. परिवार ने आरोपियों की रिहाई के बाद धमकी मिलने की शिकायत भी पुलिस से की थी.
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि न्यायिक रिमांड आवेदन खारिज होना हत्या के मामले में दोषमुक्ति का निर्णय नहीं था. मामला विवेचना और न्यायालयीन प्रक्रिया के अधीन बना हुआ था.
परिजनों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांगा न्याय
23 अक्टूबर को मृतिका के दादा उत्तम मोहले, परिजनों, ग्रामीणों और सरपंच ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की. परिवार ने आर्थिक सहायता और सुरक्षा उपलब्ध कराने का भी आग्रह किया. ज्ञापन में परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति और घटना के बाद पैदा हुए भय के माहौल का उल्लेख किया गया था.
परिजनों का कहना था कि एक ओर उन्होंने अपनी नाबालिग बेटी को खो दिया है, वहीं दूसरी ओर न्यायिक रिमांड खारिज होने के बाद परिवार असुरक्षित महसूस कर रहा है. परिवार की मांग थी कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, आरोपियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए और परिवार को आर्थिक सहायता के साथ सुरक्षा भी मिले. परिजनों ने धमकी मिलने की शिकायत सिटी कोतवाली में देकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की थी.
कलेक्टर और एसएसपी पहुंचे पीड़ित परिवार के घर, मां ने बयां की पीड़ा
26 अक्टूबर को कलेक्टर अमृत विकास तोपनो और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल पीड़ित परिवार से मिलने नेवासपुर स्थित उनके घर पहुंचे. अधिकारियों ने परिजनों से बातचीत कर उनकी पीड़ा और पारिवारिक परिस्थितियों की जानकारी ली. इस दौरान मृतिका की मां भावुक हो गईं. उन्होंने बताया कि उनकी बेटी के कातिल खुलेआम घूम रहे हैं और उन्हें जेल तक नहीं भेजा गया है. बेटी को खोने के बाद परिवार पहले ही गहरे सदमे में है. न्याय की प्रतीक्षा और आरोपियों की रिहाई से जुड़ी परिस्थितियों ने उनकी पीड़ा और बढ़ा दी थी. मां ने दोषियों को उम्रकैद की सजा दिलाने की मांग की.
उपमुख्यमंत्री साव ने मृतिका की मां से की बात
कलेक्टर ने उनकी डिप्टी सीएम अरुण साव से फोन पर बात भी कराई, जिसमें मां ने अपनी बेटी की मौत से जुड़ा दर्द साझा किया और न्याय की गुहार लगाते हुए दोषियों को उम्रकैद की सजा देने देने की मांग की l कलेक्टर ने परिवार की आर्थिक और आवासीय स्थिति की जानकारी लेते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना सहित शासन की पात्र जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए पहल करने का भरोसा दिया.
जिला एवं सत्र न्यायालय में पहुंचा मामला, राज्य शासन ने दी चुनौती
CJM न्यायालय से रिमांड आवेदन खारिज होने के बाद राज्य शासन की ओर से निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने के लिए आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की गई. मामला जिला एवं सत्र न्यायालय की प्रक्रिया से होते हुए प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सोम की अदालत में पहुंचा. पुनरीक्षण न्यायालय के सामने मुख्य प्रश्न यह था कि CJM न्यायालय का पूर्व आदेश विधि और उपलब्ध तथ्यों के अनुरूप था या नहीं. सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से पक्ष रखा गया और न्यायालय ने संबंधित अभिलेखों और केस डायरी का परीक्षण किया.
29 अक्टूबर को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ने राज्य शासन की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका स्वीकार की. न्यायालय ने CJM के पूर्व आदेश को विधि और तथ्यों के अनुरूप नहीं पाते हुए निरस्त कर दिया.अदालत ने दोनों आरोपियों को 30 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, मुंगेली के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया. इस आदेश के साथ मामले में न्यायिक रिमांड को लेकर चल रहा विवाद एक नए चरण में पहुंच गया. जिस आदेश के बाद आरोपियों को व्यक्तिगत बंधपत्र पर छोड़ा गया था, उसी आदेश को पुनरीक्षण न्यायालय ने निरस्त कर दिया.
30 अक्टूबर को दोनों आरोपियों को जेल दाखिल कराया

अपर सत्र न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी की. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल के निर्देशन में दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया. मुंगेली पुलिस ने 30 अक्टूबर को अजीत घृतलहरे, पिता शिवकुमार, उम्र 22 वर्ष और साहिल खाण्डे, पिता दिलीप, उम्र 20 वर्ष, दोनों निवासी ग्राम लिलवाकापा, थाना सिटी कोतवाली, जिला मुंगेली को न्यायिक रिमांड पर जेल दाखिल करा दिया गया. इस कार्रवाई के साथ रिमांड खारिज होने से शुरू हुआ घटनाक्रम महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंचा. पहले न्यायिक रिमांड आवेदन खारिज हुआ, फिर परिवार ने न्याय और सुरक्षा के लिए प्रशासन से गुहार लगाई, कलेक्टर और एसएसपी ने घर पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की और इसके बाद राज्य की पुनरीक्षण याचिका स्वीकार होने पर दोनों आरोपियों को जेल भेजने की प्रक्रिया पूरी हुई.
प्रेम संबंध और दूसरे युवक से बातचीत की शंका को बताया हत्या की वजह
पुलिस की विवेचना में सामने आया कि प्रेम संबंध और मृतिका के किसी अन्य युवक से बातचीत करने की शंका के चलते मुख्य आरोपी अजीत घृतलहरे ने वारदात को अंजाम दिया. पुलिस का कहना है कि 19 अक्टूबर की रात मुख्य आरोपी ग्राम नेवासपुर पहुंचा और नाबालिग बालिका का गला दबाकर हत्या कर दी. इस मामले में उसके साथी साहिल खाण्डे की भूमिका भी सामने आई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण गला घोंटना और दम घुटना बताया गया है. पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल जब्त की थी. मामले में सिटी कोतवाली और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने विवेचना की.