रायपुर। छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। अंबिकापुर के अमेरा खदान से तिल्दा की स्टील कंपनी के लिए निकला लाखों रुपए का करीबन 70 टन कोयला रास्ते में पलक झपकते ही गायब हो जाता है। मामले में लिखित शिकायत भी होती है, लेकिन पुलिस अपराध तक दर्ज नहीं करती है। सवाल यह है कि आखिरकार पुलिस किसे बचाने का प्रयास कर रही है।
स्वास्तिक एनर्जी एंड मिनरल्स बेनिफिकेशन प्राइवेट लिमिटेड की ओर से 17 अक्टूबर को तिल्दा-नेवरा थाने में शिकायत देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। कंपनी का दावा है कि जीपीएस रिपोर्ट में एक ट्रक के पथरिया में करीब 6 घंटे 48 मिनट और दूसरे के उदयपुर में करीब 8 घंटे 30 मिनट तक रुके रहने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा कई दूसरे स्थानों पर भी घंटों के ठहराव का उल्लेख शिकायत में किया गया है। इसके साथ शिकायत में कुछ लोगों की भूमिका की जांच की मांग की गई है।
अब बड़ा सवाल यह है कि शिकायतकर्ता जीपीएस ट्रैकिंग, समय-मुद्रांकित कैमरा रिकॉर्ड और परिवहन दस्तावेजों को अहम साक्ष्य बता रहा है, फिर भी पुलिस कार्रवाई करने से क्यों पीछे हट रही है। सवाल यह भी है कि क्या पुलिस ने इन रिकॉर्ड को सुरक्षित करने और उनकी जांच करने की कार्रवाई शुरू की है? क्या संबंधित ट्रकों का भौतिक निरीक्षण हुआ? क्या टोल प्लाजा, फास्टैग और धर्मकांटा के रिकॉर्ड खंगाले गए? और क्या कथित घटनास्थलों की पड़ताल की गई?
हकीकत यह है कि प्रमाण के साथ लिखित शिकायत करने के बाद भी पुलिस अपराध दर्ज नहीं कर रही है। अब देखना होगा कि तिल्दा-नेवरा पुलिस इस मामले में कब एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच करती है, या करीब 70 टन कोयले के परिवहन से जुड़े बड़ा गंभीर सवाल जवाब का इंतजार करते रह जाता है।