स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने जल्द भुगतान होने का दिया आश्वासन, महीनों से राशि मिलने का इंतजार कर रहे नर्सिंग होम संचालक
रायपुर। आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम को मिलने वाली राशि के लंबित भुगतान का मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस मुद्दे को देश का प्रहरी के प्रधान संपादक शैलेश आनंद सोजवाल ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के समक्ष उठाया। मुलाकात के दौरान आयुष्मान योजना के अंतर्गत अस्पतालों को होने वाले भुगतान में देरी और इससे नर्सिंग होम संचालकों को हो रही परेशानियों को लेकर चर्चा की गई।
महीनों से भुगतान का इंतजार
आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र मरीजों को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार निःशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इस योजना के अंतर्गत इलाज करने वाले निजी अस्पतालों को उपचार के बदले निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार भुगतान किया जाता है। हालांकि, नर्सिंग होम संचालकों का कहना है कि योजना के तहत किए गए उपचार की राशि लंबे समय से लंबित है।
भुगतान में देरी के कारण अस्पतालों के संचालन, कर्मचारियों के वेतन, दवाइयों की उपलब्धता और अन्य जरूरी खर्चों को लेकर आर्थिक दबाव बढ़ने की चिंता जताई जा रही है। ऐसे में लंबित राशि का समय पर भुगतान होना अस्पतालों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री ने दिया जल्द भुगतान का आश्वासन
प्रधान संपादक शैलेश आनंद सोजवाल ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से मुलाकात कर इस विषय पर चर्चा की और लंबित भुगतान के मामले में आवश्यक पहल करने का आग्रह किया। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने जल्द भुगतान होने का आश्वासन दिया।
मंत्री के आश्वासन के बाद अब निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम संचालकों को लंबित राशि जारी होने की उम्मीद है। हालांकि, भुगतान किस समय तक होगा और कितनी राशि जारी की जाएगी, इसे लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
मरीजों के हित में समय पर भुगतान जरूरी
आयुष्मान योजना का उद्देश्य पात्र लोगों को आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में योजना के तहत उपचार करने वाले अस्पतालों को समय पर भुगतान मिलना भी जरूरी है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन सुचारु रूप से जारी रह सके और मरीजों को इलाज के दौरान परेशानियों का सामना न करना पड़े।
अब देखना होगा कि स्वास्थ्य मंत्री के आश्वासन के बाद लंबित भुगतान की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और निजी अस्पतालों को राहत कब तक मिल पाती है।