भट्ठीयो मे नहीं है सस्ती शराब.. शराब प्रेमियों का फेफड़ा है उदास, मजबूरी मे पीना पड़ रहा महंगी शराब

प्लास्टिक बोतलों मे शराब परोसने का है सरकार का मंसूबा, मगर शराब दुकानों मे नहीं पहुचा पा रहे शराब

शैलेश आनंद सोजवाल

रायपुर : शराब बिक्री और शराब पीने के मामले मे छत्तीसगढ़ पूरे देश मे विख्यात है.. सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व देने के मामले मे भी शराब का अहम किरदार है.. मगर प्रदेश भर के शराब भट्ठियों (दुकानों) मे सस्ती शराब गायब हो गई है.. सस्ती शराब या यू कहे सबसे ज्यादा बिकने वाली देशी शराब (प्लेन व मसाला) यदा कदा ही मिल पा रहा है लेकिन वह भी कुछ ही घंटे मे भट्ठियों से रफ़ूचक्कर हो जाते है..

सबसे ज्यादा दुखी देशी शराब (प्लेन व मसाला)  पीने वाले मदिरा प्रेमी है.. दिनभर मे 4 से ज्यादा पौव्वा पीने वाले ये लोग शराब नहीं मिलने से सरकार को कोसते नजर आ रहे है.. शराब की सबसे ज्यादा बिक्री भी देशी शराब (प्लेन व मसाला)  व गोवा की ही होती है और मदिरा प्रेमियों के बीच काफी पसंदीदा भी मानी जाति है ऐसे मे आबकारी विभाग शराब की पूर्ति नहीं कर पा रहा है जो मदिरा प्रेमियों के बीच साय सरकार की छबी को धूमिल करता नजर आ रहा है..

कांच की शीशी से प्लास्टिक की बोतल का किस्सा

साय सरकार ने शराब को कांच की बोतलों से निकालकर प्लास्टिक की बोतलों मे परोसने की योजना बनाई और यह प्रकिया भी ट्रेन की रफ्तार से पुरी कर शराब दुकानों मे पहुचाने की कवायद भी शुरू कर दी…. मगर शराब दुकानों मे कांच की बोतलों मे रखी सस्ती शराब तो गायब हो गई लेकिन प्लास्टिक की बोतलों मे भरकर अब तक शराब भट्ठियों मे नहीं पहुच पाई नतिजन मदिरा प्रेमी अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहे है

शराब भट्ठियों मे मौजूद कई मदिरा प्रेमियों ने आक्रोश जताते हुए यह भी कहा कि “सरकार को मदिरा प्रेमियों की जरा भी चिंता नहीं है.. ऐसी ऐसी ब्रांड की शराब भट्ठियों मे मिल रही है जिसको काभी नहीं देखा.. क्वालिटी और स्वाद ऐसा है मानो नाली या गटर का पानी भरकर बेचा जा रहा है “

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