रायपुर की सड़कें अब पहले से चौड़ी लगने लगी है. इसकी वजह अवैध कब्जों पर चला बुलडोजर है. इस कार्रवाई से सड़क पर चलने वाले लोग काफी खुश है, तो कुछ जरूरतमंद लोग और गरीब अपनी रोजी-रोटी छीन जाने से दुखी है. लेकिन वो गरीब करें भी तो करें क्या ? क्योंकि उनके हक की दुकानों पर तो बड़े-बड़े लोगों का कब्जा है और उसपर कार्रवाई हो ऐसी हिमाकत भला कौन करें!

हम राजधानी रायपुर के सिर्फ दो प्रोजेक्ट की बात करते है, जहां गरीबों के हक की दुकानों में अमीरों का कब्जा है. यहां गरीब को मिलने वाली दुकानों में अमीर ने खुद को गरीब बताकर दुकान तो खरीद ली और उसे पुन: गरीब या यू कहें कि ठेले-खोमचे वाले जरूरतमंद को 5-6 गुना महंगे दामों पर वो दुकान दे दी.
हम बात कर रहे है देवेंद्र नगर नमस्ते चौक के पास की नगर निगम की करीब 50 और पंडरी पुराने बस स्टैंड के पास की 60 दुकानों की. यहां आलम ये है कि लोगों ने अपनी पहुंच और खुद को कागजों में गरीब दिखाकर दुकानें तो किराये पर ले ली, इसका किराया वो नगर निगम को महज 1000 रुपए देते है. लेकिन इसी दुकान को वो पुनः किसी जरूरतमंद को देकर उनसे 5 से 7 हजार रुपए तक का किराया वसूलते है.