रायपुर। लगातार बढ़ती महंगाई पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सप्ताह के पहले दिन से चावल, दाल, राशन सामग्री पर सरकार ने दाम बढ़ाए. पेट्रोल-डीजल महंगे हुए. आम जनता महंगाई की मार झेल रही है. आम-जनता के लिए यात्री बस किराए बढ़ाया गया. एक साल में दो बार 75 प्रतिशत से अधिक किराया बढ़ाया गया. महतारी वंदन के नाम से पैसा देकर आम जनता से सरकार पैसा वसूलने का काम कर रही है.
धान खरीदी से पहले पटवारियों की हड़ताल पर दीपक बैज ने कहा कि पूरे प्रदेश में नवंबर महीने से धान खरीदी होना है. पटवारी हड़ताल पर चले गए हैं. सरकार को तत्काल बात कर हड़ताल को खत्म करना चाहिए. यह पहली बार नहीं हुआ है. पिछली बार भी ऐसा हुआ था. इसके कारण कई किसान धान नहीं बेच पाए थे. सरकार जानबूझ कर ऐसा कर रही है, ताकि धान खरीदना ना पड़े.
कौशल्या माता धाम में भगवान राम की अब तक नई मूर्ति नहीं लगने पर दीपक बैज ने तंज कसते हुए कहा कि राम मंदिर के नाम से मंदिर बना लो. मंदिर में चढ़ावा चोरी कर लो. गौ माता के नाम से चारा खा लो. सरकार में यही चल रहा है. 15 साल भी यही चल रहा था. भगवान राम के नाम से यह चंदा चोरी करने वाले है.
क्यों नहीं लगा रहे हैं राम की मूर्ति
उन्होंने कहा कि भगवान राम और कौशल्या माता की चिंता क्या करेंगे. मूर्ति तैयार है, अभी तक मूर्ति क्यों नहीं लग रहे हैं. इनको जवाब देना चाहिए. हमारी सरकार में मूर्ति बदलने का निर्णय हुआ था, हमारी सरकार में मूर्ति तैयार की गई है. कोई मूर्ति गलत नहीं है. यह मूर्ति नहीं लगाना चाहते हैं. यह राम के नाम के राजनीति करते हैं. गौ माता के नाम पर राजनीति करते हैं. मंदिरों का चंदा चढ़ावा चोरी करना है, यही इनका धंधा है.
आदिवासी विरोध है सरकार
आदिवासी विभाग का नाम बदलने को लेकर दीपक बैज ने कहा कि सरकार लगातार आदिवासी हितों को दरकिनार कर कुचलने का काम कर रही है. एक आदिवासी मुख्यमंत्री और मंत्री मुंह पर पट्टी बांध कर बैठे हैं. आदिवासी विभाग को बदल कर जनजाति विभाग? इतनी नफ़रत क्यो है बीजेपी को आदिवासी समाज से. हम इसका पूरा विरोध करते है तत्काल निर्णय वापस ले. ये सरकार आदिवासी विरोधी है.
बिजली बिल को तत्काल कम करें
बिजली बिल पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि साल भर में दो-दो बार बिजली बिल बढ़ाया गया है. इस बार बिल में 600 से ₹1000 तक अतिरिक्त प्रभार जुड़ कर आया है. बढ़े बिजली बिल को तत्काल कम करना चाहिए. कोयला से लेकर सारे संसाधन हमारे पास हैं. फिर भी सरकार पर्याप्त बिजली उत्पादन नहीं कर पा रही है. दूसरे राज्यों से महंगी दर पर बिजली खरीदना पड़ रहा है.