जगदलपुर. चक्रवाती तूफान की आशंका ने बस्तर संभाग में प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. मौसम विभाग ने बस्तर, कोंडागांव, दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर में भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है. मौसम के बदले मिजाज का असर अब दिखाई देने लगा है, आसमान में घने बादल छाए हैं और कई इलाकों में बूंदाबांदी शुरू हो गई है. सुबह से चल रही हवाओं के बीच प्रशासन ने संभावित खतरे से निपटने के लिए सतर्कता बढ़ा दी है. खास बात यह है कि इस बार ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए स्थानीय बोलियों में मुनादी कराई जा रही है. कोटवार गांव-गांव पहुंचकर लोगों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित रहने की सलाह दे रहे हैं. नदी-नालों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने के लिए कहा गया है. प्रशासन ने अनावश्यक रूप से बाहर निकलने और तेज हवाओं के दौरान जोखिम उठाने से बचने की अपील की है. अगले कुछ दिन मौसम के लिहाज से बस्तर के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. अब नजर इस बात पर है कि चक्रवाती तूफान का असर कितना व्यापक होता है और प्रशासन की तैयारियां चुनौती से कैसे निपटती हैं.
Bastar News Update : धान की कटाई के समय बारिश का खतरा, किसानों की बढ़ी धड़कनें
जगदलपुर. खेतों में पककर तैयार धान की फसल के बीच एक बार फिर मौसम किसानों की परीक्षा लेने जा रहा है. चक्रवाती तूफान के संभावित असर और भारी बारिश की चेतावनी ने बस्तर के किसानों की चिंता बढ़ा दी है. हाल ही में बाढ़ और जलभराव से फसल गंवा चुके किसानों के सामने अब दोबारा नुकसान का खतरा खड़ा हो गया है. कई इलाकों में खरीफ धान की कटाई का दौर शुरू हो चुका है, ऐसे में बारिश का समय किसानों के लिए बेहद अहम है. खेतों में खड़ी फसल तेज हवाओं के कारण गिर सकती है और पानी भरने से धान खराब होने की आशंका है. कटाई के बाद खुले में रखी उपज भी बारिश की चपेट में आकर भीग सकती है. किसानों को डर है कि लगातार मौसम बिगड़ने से उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फिर सकता है. एक ओर फसल को सुरक्षित निकालने की चुनौती है, तो दूसरी ओर मौसम की अनिश्चितता ने मुश्किल बढ़ा दी है. प्रशासन ने ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है, लेकिन किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता फसल को बचाना है. अब मौसम की चाल तय करेगी कि खेतों में तैयार धान सुरक्षित घर पहुंचता है या किसानों को एक और नुकसान झेलना पड़ता है.
Bastar News Update : 18 से ज्यादा राहत शिविर तैयार, नदी किनारे के गांवों पर विशेष नजर
जगदलपुर. संभावित चक्रवाती तूफान और भारी बारिश से निपटने के लिए बस्तर जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं. कलेक्टर आकाश छिकारा के निर्देशन में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए सतर्कता बढ़ाई गई है. इंद्रावती, मार्कण्डी और नारंगी नदियों के तटीय तथा निचले इलाकों में बसे गांवों पर विशेष नजर रखी जा रही है. ग्रामीणों को संभावित खतरे की जानकारी देने के लिए गांवों में मुनादी कराई जा रही है. प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराने के लिए 18 से अधिक भवनों में राहत शिविर तैयार किए हैं. बारिश के दौरान जलस्तर बढ़ने की स्थिति में लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी है. बचाव कार्यों के लिए नगर सेना, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों को सतर्क रखा गया है. जिला कार्यालय में 24 घंटे संचालित बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है. यहां से बारिश और नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके. अब चुनौती यह है कि मौसम बिगड़ने की स्थिति में इन तैयारियों के जरिए ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
Bastar News Update : जनवरी में खुलने वाली थी ग्रीन गुफा, नौ महीने बाद भी पर्यटकों को इंतजार
जगदलपुर. कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान की प्राकृतिक धरोहर ग्रीन गुफा को पर्यटन के लिए खोलने की योजना अब तक जमीन पर नहीं उतर पाई है. जनवरी 2026 में इस गुफा को आम सैलानियों के लिए खोलने की बात कही गई थी, लेकिन नौ महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी इंतजार खत्म नहीं हुआ है. कोटमसर के समीप कंपार्टमेंट क्रमांक 85 में स्थित यह गुफा अपनी अनोखी प्राकृतिक बनावट के लिए जानी जाती है. गुफा की दीवारों और छत पर मौजूद चूने की आकृतियों पर हरे रंग की सूक्ष्मजीवी परतें इसे विशिष्ट पहचान देती हैं. गुफा के भीतर की हरी दीवारें और प्राकृतिक संरचनाएं पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती हैं. इसी संभावना को देखते हुए इसे पर्यटन मानचित्र पर लाने और स्थानीय रोजगार बढ़ाने की योजना बनाई गई थी. योजना के तहत पहुंच मार्ग, पैदल पथ और पर्यटकों की सुविधा से जुड़ी आधारभूत संरचनाएं विकसित करने की बात कही गई थी. हालांकि, अब तक पर्यटकों के लिए गुफा खोलने की दिशा में कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही है. वन विभाग गुफा की सुरक्षा और निगरानी कर रहा है, लेकिन पर्यटन सुविधा विकसित करने का काम आगे बढ़ता नजर नहीं आता. ऐसे में सवाल है कि प्राकृतिक धरोहर को पर्यटन से जोड़ने की घोषणा कब पूरी होगी और स्थानीय लोगों को इसका लाभ कब मिलेगा.
Bastar News Update : चक्रवात का असर रेल सेवाओं पर, 56 ट्रेनें रद्द और 15 के समय में बदलाव
जगदलपुर. चक्रवाती तूफान अरनब की आशंका अब रेल यात्रियों की मुश्किलें भी बढ़ा रही है. मौसम की स्थिति को देखते हुए दक्षिण तट रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा और रेल परिचालन को ध्यान में रखकर एहतियाती कदम उठाए हैं. रेलवे की घोषणा के अनुसार, 27, 28 और 29 अक्टूबर को कुल 56 ट्रेन सेवाएं रद्द की गई हैं, जबकि 15 ट्रेनों के समय में बदलाव किया गया है. इसका असर केके रेललाइन समेत प्रभावित रेलखंडों से यात्रा करने वाले यात्रियों पर पड़ सकता है. रेलवे के महाप्रबंधक संदीप माथुर मौसम की स्थिति और परिचालन व्यवस्था पर लगातार नजर रख रहे हैं. सभी संबंधित अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. यात्रियों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए आपातकालीन नियंत्रण कक्ष और समर्पित हेल्पलाइन सक्रिय करने के निर्देश भी दिए गए हैं. रेलवे ने राज्य सरकारों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया है. हालांकि, ट्रेन रद्द होने और समय बदलने से यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना दोबारा बनानी पड़ सकती है. ऐसे में यात्रियों के लिए जरूरी है कि स्टेशन पहुंचने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति और संशोधित समय की पुष्टि कर लें.
हैदराबाद से अंबिकापुर तक विमान सेवा का विस्तार, जगदलपुर को भी मिलेगा फायदा
जगदलपुर. दक्षिण छत्तीसगढ़ के जगदलपुर और उत्तर छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में विमान सेवा का विस्तार महत्वपूर्ण माना जा रहा है. एलायंस एयर ने हैदराबाद से रायपुर के बीच संचालित अपनी उड़ान को अब अंबिकापुर तक बढ़ाने की योजना बनाई है. प्रस्तावित सेवा मंगलवार, गुरुवार और शुक्रवार को संचालित होगी. निर्धारित समय-सारिणी के मुताबिक, विमान सुबह हैदराबाद से रवाना होकर जगदलपुर पहुंचेगा और फिर रायपुर होते हुए अंबिकापुर जाएगा. वापसी में अंबिकापुर से रायपुर और जगदलपुर होते हुए विमान हैदराबाद पहुंचेगा. इस कनेक्टिविटी से बस्तर और उत्तर छत्तीसगढ़ के बीच यात्रा के नए विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं. जगदलपुर से अंबिकापुर की सड़क दूरी करीब 600 किलोमीटर बताई जाती है और सड़क से सफर में लगभग 12 घंटे लग सकते हैं. ऐसे में हवाई संपर्क से कारोबारियों, पर्यटकों और दूसरे जरूरी कामों से यात्रा करने वालों को फायदा मिलने की उम्मीद है. हालांकि, इस सेवा में सब्सिडी नहीं मिलने के कारण यात्रियों को व्यावसायिक दरों पर टिकट लेना होगा. अब इस विस्तार का वास्तविक लाभ किराये, नियमित संचालन और यात्रियों की मांग पर निर्भर करेगा.
Bastar News Update : रावघाट माइंस में पांचवें दिन भी हड़ताल, खनन और डिस्पैच ठप
नारायणपुर. रावघाट लौह अयस्क परियोजना में कर्मचारियों का आंदोलन अब उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था तक पहुंच गया है. 16 सूत्रीय मांगों को लेकर 23 अक्टूबर से शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल पांचवें दिन भी जारी है. कर्मचारियों के मुताबिक, वेतन, पीएफ, ईएसआई और दूसरी सुविधाओं से जुड़ी मांगों पर अब तक ठोस समाधान नहीं निकला है. आंदोलनकारियों का आरोप है कि बीएसपी और केसीसीएल के उच्च अधिकारियों ने धरना स्थल पर पहुंचकर बातचीत की पहल नहीं की है. इसी नाराजगी के बीच 27 अक्टूबर से माइनिंग और डिस्पैच का काम पूरी तरह बंद कर दिया गया है. ए ब्लॉक के निरीक्षण में भी खनन कार्य बंद मिलने की जानकारी सामने आई है. इस आंदोलन में कांकेर और नारायणपुर क्षेत्र के 417 से अधिक कर्मचारियों के शामिल होने की बात कही गई है. कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक बीएसपी के ईडी और केसीसीएल के डायरेक्टर स्तर के अधिकारी मौके पर पहुंचकर उनकी समस्याएं नहीं सुनते, आंदोलन जारी रहेगा. लगातार काम बंद रहने से परियोजना के खनन और लौह अयस्क की आपूर्ति से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं. अब निगाहें प्रबंधन पर टिकी हैं कि वह बातचीत शुरू कर गतिरोध खत्म करता है या आंदोलन और लंबा खिंचता है.
मानदेय से नियमितीकरण तक की मांग, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने खोला मोर्चा
सुकमा. आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन और सरकारी योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने वाली कार्यकर्ता-सहायिकाएं अब अपने अधिकारों के लिए लामबंद हो गई हैं. कम मानदेय, बढ़ते काम के बोझ और भविष्य की सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर जिले के ब्लॉक मुख्यालयों में प्रदर्शन किए गए. तोंगपाल तहसील कार्यालय के सामने भी सैकड़ों कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की. प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने पांच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा. संयुक्त मंच ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और विभागीय सचिव के नाम भी ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के निराकरण की मांग की है. कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांग है कि उन्हें नियमित किया जाए और तब तक श्रम कानूनों के अनुरूप मानदेय दिया जाए. मंच ने कार्यकर्ताओं के लिए 30 हजार और सहायिकाओं के लिए 25 हजार 500 रुपये प्रतिमाह मानदेय की मांग रखी है. इसके अलावा कार्यकर्ताओं को सुपरवाइजर और सहायिकाओं को कार्यकर्ता पद पर पदोन्नति देने की मांग की गई है. समूह बीमा, पेंशन, ग्रेच्युटी, अनुकंपा नियुक्ति और सेवानिवृत्ति पर आर्थिक सहायता भी मांगों में शामिल हैं. अब देखना होगा कि लंबे समय से सेवा दे रही इन महिलाओं की मांगों पर शासन क्या निर्णय लेता है.
पत्रकारिता की आड़ में वसूली का आरोप, सरपंच संघ ने की जांच की मांग
जगदलपुर. बस्तर जिले में सरपंचों से कथित तौर पर पैसों की मांग और ब्लैकमेलिंग के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. मामले को लेकर सरपंच संघ जिला बस्तर के प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा है. संघ ने आरोप लगाया है कि कुछ लोग फोन और व्हाट्सएप के जरिए खुद को पत्रकार बताकर सरपंचों से पैसे मांगते हैं. ज्ञापन के मुताबिक, पैसे नहीं देने पर झूठे आरोप लगाकर बदनाम करने और परेशान करने की धमकी दिए जाने की बात कही गई है. पंचायतों में कराए गए निर्माण कार्यों का हिसाब मांगकर सरपंचों पर दबाव बनाने का आरोप भी लगाया गया है. संघ का कहना है कि निर्माण कार्यों का तकनीकी मूल्यांकन संबंधित इंजीनियर और एसडीओ की जिम्मेदारी है. इसके बावजूद कथित रूप से कुछ लोगों द्वारा सरपंचों को निशाना बनाकर दबाव बनाया जा रहा है. सरपंच संघ ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है. साथ ही कहा है कि जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए. फिलहाल ये आरोप ज्ञापन के जरिए सामने आए हैं; मामले की वास्तविकता जांच और पुलिस की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी.