क्या दिवाली से पहले आयुष्मान योजना का भुगतान करेगी सरकार? निजी अस्पतालों के डॉक्टरों और स्टाफ की बढ़ी चिंता

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों को मिलने वाली राशि के भुगतान को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पतालों को समय पर भुगतान नहीं मिलने की समस्या से डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन पर आर्थिक दबाव बढ़ने की चिंता जताई जा रही है। ऐसे में दिवाली नजदीक आने के साथ अस्पतालों के डॉक्टरों और कर्मचारियों के सामने वेतन, मानदेय और अन्य खर्चों के भुगतान को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मरीजों को मुफ्त इलाज, लेकिन अस्पतालों को भुगतान का इंतजार!

सरकार आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से पात्र मरीजों को निर्धारित सीमा और नियमों के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने का दावा करती है। योजना के तहत निजी अस्पताल भी मरीजों का उपचार करते हैं और इलाज के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार भुगतान के लिए क्लेम प्रस्तुत करते हैं।

लेकिन यदि इन क्लेम का भुगतान लंबे समय तक लंबित रहता है, तो अस्पतालों के नियमित संचालन पर इसका असर पड़ सकता है। अस्पतालों को डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ का वेतन, दवाइयों की खरीद, मेडिकल उपकरणों का रखरखाव, बिजली बिल और अन्य जरूरी खर्चों का भुगतान करना पड़ता है।

भुगतान अटकने से आर्थिक दबाव

निजी अस्पतालों के लिए समय पर भुगतान होना जरूरी है, ताकि मरीजों को इलाज देने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं को भी सुचारू रूप से संचालित किया जा सके। बकाया राशि मिलने में देरी होने पर छोटे और मध्यम स्तर के अस्पतालों के सामने आर्थिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि यदि अस्पतालों को समय पर भुगतान नहीं मिलता है, तो डॉक्टरों और कर्मचारियों के वेतन तथा दिवाली जैसे त्योहारों से जुड़े खर्चों का प्रबंधन कैसे होगा?

सरकार से उठ रहे सवाल

आयुष्मान योजना के तहत पात्र मरीजों को कैशलेस इलाज उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी के साथ अस्पतालों के लंबित क्लेम का समय पर निपटारा भी महत्वपूर्ण है। अब सवाल यह है कि सरकार निजी अस्पतालों की बकाया राशि के भुगतान को लेकर क्या कदम उठाएगी और क्या दिवाली से पहले अस्पतालों को राहत मिल पाएगी?

फिलहाल प्रमुख सवाल यही है कि आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों की लंबित राशि का भुगतान कब तक होगा और डॉक्टरों व स्टाफ को त्योहार से पहले आर्थिक राहत मिल पाएगी या नहीं।